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माँ अन्नपूर्णा50 monthly searches

Annapurna Mata Ki Aarti

Annapurna Mata ki aarti is a traditional devotional prayer centred on माँ अन्नपूर्णा. This page keeps the canonical aarti name, its opening line, meaning and a respectful daily practice together for devotees and families.

Annapurna Devi
Devotional artwork for Annapurna Mata aartiA quiet space for prayer, gratitude and remembrance
Famous traditional aartiTitle + opening

Jai Annapurna Mata

जय अन्नपूर्णा माता, मैया जय अन्नपूर्णा माता

यहाँ पारंपरिक शीर्षक, प्रचलित मुखड़ा और एक प्रचलित मंत्र/लघु-आवाहन का संदर्भ दिया गया है। पूर्ण पाठ और मंत्र-पाठ परिवार, मंदिर, संप्रदाय और क्षेत्रीय परंपरा के अनुसार बदल सकते हैं।
Mantra

अन्नपूर्णा माता मंत्र

ॐ अन्नपूर्णायै नमः

साफ और शांत स्थान पर अपनी श्रद्धा के अनुसार 11, 21 या 108 बार जप करें।
Chalisa / भक्ति रचनाOriginal composition

अन्नपूर्णा माता के लिए मौलिक 40-पद भक्ति रचना

अन्नपूर्णा माता का स्मरण कर, मन में जागे प्रकाश।

भक्ति, सेवा, सत्य से, जीवन हो उल्लास॥

करुणा की छाया मिले, दृढ़ हो मेरा मान।

मंगल पथ पर साथ दो, स्वीकारो यह गान॥

1. अन्नपूर्णा माता, अन्न के दाता।

मन में जगाओ शुभ विचार॥

2. तेरे स्मरण से पोषण जागे।

जीवन के तम सब दूर भागे॥

3. सच्चे मन से नाम पुकारूँ।

दान का दीप हृदय में धारूँ॥

4. कर्म-पथ पर देना सहारा।

अन्नपूर्णा माता, तुम हो एकमात्र हमारा॥

5. लोभ-भय से मन को बचाना।

सत्य-सेवा का पाठ पढ़ाना॥

6. घर-आंगन में मंगल लाना।

दीन जनों को गले लगाना॥

7. बुद्धि, बल और धीरज देना।

अच्छे कर्मों का फल ही लेना॥

8. दुख में रखना मन को स्थिर।

सुख में रखना भाव समुचित॥

9. जिनके जीवन में है अँधियारा।

उनके लिए बनो तुम तारा॥

10. हर प्राणी में रूप तुम्हारा।

सेवा से हो पंथ उजियारा॥

11. अन्नपूर्णा माता, दान के दाता।

मन में जगाओ शुभ विचार॥

12. तेरे स्मरण से कृतज्ञता जागे।

जीवन के तम सब दूर भागे॥

13. सच्चे मन से नाम पुकारूँ।

अन्न का दीप हृदय में धारूँ॥

14. कर्म-पथ पर देना सहारा।

अन्नपूर्णा माता, तुम हो एकमात्र हमारा॥

15. लोभ-भय से मन को बचाना।

सत्य-सेवा का पाठ पढ़ाना॥

16. घर-आंगन में मंगल लाना।

दीन जनों को गले लगाना॥

17. बुद्धि, बल और धीरज देना।

अच्छे कर्मों का फल ही लेना॥

18. दुख में रखना मन को स्थिर।

सुख में रखना भाव समुचित॥

19. जिनके जीवन में है अँधियारा।

उनके लिए बनो तुम तारा॥

20. हर प्राणी में रूप तुम्हारा।

सेवा से हो पंथ उजियारा॥

21. अन्नपूर्णा माता, अन्न के दाता।

मन में जगाओ शुभ विचार॥

22. तेरे स्मरण से पोषण जागे।

जीवन के तम सब दूर भागे॥

23. सच्चे मन से नाम पुकारूँ।

दान का दीप हृदय में धारूँ॥

24. कर्म-पथ पर देना सहारा।

अन्नपूर्णा माता, तुम हो एकमात्र हमारा॥

25. लोभ-भय से मन को बचाना।

सत्य-सेवा का पाठ पढ़ाना॥

26. घर-आंगन में मंगल लाना।

दीन जनों को गले लगाना॥

27. बुद्धि, बल और धीरज देना।

अच्छे कर्मों का फल ही लेना॥

28. दुख में रखना मन को स्थिर।

सुख में रखना भाव समुचित॥

29. जिनके जीवन में है अँधियारा।

उनके लिए बनो तुम तारा॥

30. हर प्राणी में रूप तुम्हारा।

सेवा से हो पंथ उजियारा॥

31. अन्नपूर्णा माता, दान के दाता।

मन में जगाओ शुभ विचार॥

32. तेरे स्मरण से कृतज्ञता जागे।

जीवन के तम सब दूर भागे॥

33. सच्चे मन से नाम पुकारूँ।

अन्न का दीप हृदय में धारूँ॥

34. कर्म-पथ पर देना सहारा।

अन्नपूर्णा माता, तुम हो एकमात्र हमारा॥

35. लोभ-भय से मन को बचाना।

सत्य-सेवा का पाठ पढ़ाना॥

36. घर-आंगन में मंगल लाना।

दीन जनों को गले लगाना॥

37. बुद्धि, बल और धीरज देना।

अच्छे कर्मों का फल ही लेना॥

38. दुख में रखना मन को स्थिर।

सुख में रखना भाव समुचित॥

39. जिनके जीवन में है अँधियारा।

उनके लिए बनो तुम तारा॥

40. हर प्राणी में रूप तुम्हारा।

सेवा से हो पंथ उजियारा॥

तन-मन-वचन सुधरें सभी, रहे सरल व्यवहार।

अन्नपूर्णा माता, चरणों में अर्पित यह, मेरा छोटा प्यार॥

यह Bharat Metro Locator के लिए लिखी गई मौलिक भक्ति-रचना है। यह किसी पारंपरिक या सर्वमान्य चालीसा का दावा नहीं करती; पाठक अपने परिवार, मंदिर या गुरु की प्रमाणित परंपरा को प्राथमिकता दें।
Meaning

What this prayer remembers

Annapurna aarti honours food as a shared responsibility and remembers the people, soil and work behind every meal.

Simple puja vidhi

How to read the aarti

Offer the first thought of gratitude to the source of food and avoid waste as part of the worship itself.

  1. Prepare a clean, calm place and light a diya safely.
  2. Take a breath, remember the deity and recite the traditional opening with attention.
  3. Close with gratitude and carry one value from the prayer into the day.
When to read

Aarti for the right moment

Read before meals, during Annapurna puja and when expressing gratitude for food and nourishment.

Common questions
What is the traditional aarti for Annapurna Mata?

Jai Annapurna Mata is the traditional aarti title most commonly associated with this devotional form. Regional families may sing a different local version.

When should I read Annapurna Mata Ki Aarti?

Read before meals, during Annapurna puja and when expressing gratitude for food and nourishment.

What is the meaning of Annapurna Mata Ki Aarti?

Annapurna aarti honours food as a shared responsibility and remembers the people, soil and work behind every meal.