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श्री दत्तात्रेय5,000 monthly searches

Dattatreya Ji Ki Aarti

Dattatreya Ji ki aarti is a traditional devotional prayer centred on श्री दत्तात्रेय. This page keeps the canonical aarti name, its opening line, meaning and a respectful daily practice together for devotees and families.

Datta GuruDattaguru
Devotional artwork for Dattatreya Ji aartiA quiet space for prayer, gratitude and remembrance
Famous traditional aartiTitle + opening

Trigunatmak Trimurti Datt

त्रिगुणात्मक त्रैमूर्ती दत्त हा जाणा

यहाँ पारंपरिक शीर्षक, प्रचलित मुखड़ा और एक प्रचलित मंत्र/लघु-आवाहन का संदर्भ दिया गया है। पूर्ण पाठ और मंत्र-पाठ परिवार, मंदिर, संप्रदाय और क्षेत्रीय परंपरा के अनुसार बदल सकते हैं।
Mantra

दत्तात्रेय जी मंत्र

ॐ द्रां दत्तात्रेयाय नमः

साफ और शांत स्थान पर अपनी श्रद्धा के अनुसार 11, 21 या 108 बार जप करें।
Chalisa / भक्ति रचनाOriginal composition

दत्तात्रेय जी के लिए मौलिक 40-पद भक्ति रचना

दत्तात्रेय जी का स्मरण कर, मन में जागे प्रकाश।

भक्ति, सेवा, सत्य से, जीवन हो उल्लास॥

करुणा की छाया मिले, दृढ़ हो मेरा मान।

मंगल पथ पर साथ दो, स्वीकारो यह गान॥

1. दत्तात्रेय जी, गुरु-ज्ञान के दाता।

मन में जगाओ शुभ विचार॥

2. तेरे स्मरण से प्रकृति जागे।

जीवन के तम सब दूर भागे॥

3. सच्चे मन से नाम पुकारूँ।

समभाव का दीप हृदय में धारूँ॥

4. कर्म-पथ पर देना सहारा।

दत्तात्रेय जी, तुम हो एकमात्र हमारा॥

5. लोभ-भय से मन को बचाना।

सत्य-सेवा का पाठ पढ़ाना॥

6. घर-आंगन में मंगल लाना।

दीन जनों को गले लगाना॥

7. बुद्धि, बल और धीरज देना।

अच्छे कर्मों का फल ही लेना॥

8. दुख में रखना मन को स्थिर।

सुख में रखना भाव समुचित॥

9. जिनके जीवन में है अँधियारा।

उनके लिए बनो तुम तारा॥

10. हर प्राणी में रूप तुम्हारा।

सेवा से हो पंथ उजियारा॥

11. दत्तात्रेय जी, समभाव के दाता।

मन में जगाओ शुभ विचार॥

12. तेरे स्मरण से त्याग जागे।

जीवन के तम सब दूर भागे॥

13. सच्चे मन से नाम पुकारूँ।

गुरु-ज्ञान का दीप हृदय में धारूँ॥

14. कर्म-पथ पर देना सहारा।

दत्तात्रेय जी, तुम हो एकमात्र हमारा॥

15. लोभ-भय से मन को बचाना।

सत्य-सेवा का पाठ पढ़ाना॥

16. घर-आंगन में मंगल लाना।

दीन जनों को गले लगाना॥

17. बुद्धि, बल और धीरज देना।

अच्छे कर्मों का फल ही लेना॥

18. दुख में रखना मन को स्थिर।

सुख में रखना भाव समुचित॥

19. जिनके जीवन में है अँधियारा।

उनके लिए बनो तुम तारा॥

20. हर प्राणी में रूप तुम्हारा।

सेवा से हो पंथ उजियारा॥

21. दत्तात्रेय जी, गुरु-ज्ञान के दाता।

मन में जगाओ शुभ विचार॥

22. तेरे स्मरण से प्रकृति जागे।

जीवन के तम सब दूर भागे॥

23. सच्चे मन से नाम पुकारूँ।

समभाव का दीप हृदय में धारूँ॥

24. कर्म-पथ पर देना सहारा।

दत्तात्रेय जी, तुम हो एकमात्र हमारा॥

25. लोभ-भय से मन को बचाना।

सत्य-सेवा का पाठ पढ़ाना॥

26. घर-आंगन में मंगल लाना।

दीन जनों को गले लगाना॥

27. बुद्धि, बल और धीरज देना।

अच्छे कर्मों का फल ही लेना॥

28. दुख में रखना मन को स्थिर।

सुख में रखना भाव समुचित॥

29. जिनके जीवन में है अँधियारा।

उनके लिए बनो तुम तारा॥

30. हर प्राणी में रूप तुम्हारा।

सेवा से हो पंथ उजियारा॥

31. दत्तात्रेय जी, समभाव के दाता।

मन में जगाओ शुभ विचार॥

32. तेरे स्मरण से त्याग जागे।

जीवन के तम सब दूर भागे॥

33. सच्चे मन से नाम पुकारूँ।

गुरु-ज्ञान का दीप हृदय में धारूँ॥

34. कर्म-पथ पर देना सहारा।

दत्तात्रेय जी, तुम हो एकमात्र हमारा॥

35. लोभ-भय से मन को बचाना।

सत्य-सेवा का पाठ पढ़ाना॥

36. घर-आंगन में मंगल लाना।

दीन जनों को गले लगाना॥

37. बुद्धि, बल और धीरज देना।

अच्छे कर्मों का फल ही लेना॥

38. दुख में रखना मन को स्थिर।

सुख में रखना भाव समुचित॥

39. जिनके जीवन में है अँधियारा।

उनके लिए बनो तुम तारा॥

40. हर प्राणी में रूप तुम्हारा।

सेवा से हो पंथ उजियारा॥

तन-मन-वचन सुधरें सभी, रहे सरल व्यवहार।

दत्तात्रेय जी, चरणों में अर्पित यह, मेरा छोटा प्यार॥

यह Bharat Metro Locator के लिए लिखी गई मौलिक भक्ति-रचना है। यह किसी पारंपरिक या सर्वमान्य चालीसा का दावा नहीं करती; पाठक अपने परिवार, मंदिर या गुरु की प्रमाणित परंपरा को प्राथमिकता दें।
Meaning

What this prayer remembers

Datta devotion remembers the teacher principle, the unity of different paths and the humility to learn from life.

Simple puja vidhi

How to read the aarti

Pair the aarti with study, respect for a teacher and one act of service that does not seek recognition.

  1. Prepare a clean, calm place and light a diya safely.
  2. Take a breath, remember the deity and recite the traditional opening with attention.
  3. Close with gratitude and carry one value from the prayer into the day.
When to read

Aarti for the right moment

Read on Datta Jayanti or during Thursday guru worship according to one’s family tradition.

Common questions
What is the traditional aarti for Dattatreya Ji?

Trigunatmak Trimurti Datt is the traditional aarti title most commonly associated with this devotional form. Regional families may sing a different local version.

When should I read Dattatreya Ji Ki Aarti?

Read on Datta Jayanti or during Thursday guru worship according to one’s family tradition.

What is the meaning of Dattatreya Ji Ki Aarti?

Datta devotion remembers the teacher principle, the unity of different paths and the humility to learn from life.