Satyanarayan Bhagwan Ki Aarti
Satyanarayan Bhagwan ki aarti is a traditional devotional prayer centred on सत्यनारायण भगवान. This page keeps the canonical aarti name, its opening line, meaning and a respectful daily practice together for devotees and families.
A quiet space for prayer, gratitude and remembranceJai Lakshmi Ramana
जय लक्ष्मी रमणा, स्वामी जय लक्ष्मी रमणा
यहाँ पारंपरिक शीर्षक, प्रचलित मुखड़ा और एक प्रचलित मंत्र/लघु-आवाहन का संदर्भ दिया गया है। पूर्ण पाठ और मंत्र-पाठ परिवार, मंदिर, संप्रदाय और क्षेत्रीय परंपरा के अनुसार बदल सकते हैं।सत्यनारायण भगवान मंत्र
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय
साफ और शांत स्थान पर अपनी श्रद्धा के अनुसार 11, 21 या 108 बार जप करें।सत्यनारायण भगवान के लिए मौलिक 40-पद भक्ति रचना
सत्यनारायण भगवान का स्मरण कर, मन में जागे प्रकाश।
भक्ति, सेवा, सत्य से, जीवन हो उल्लास॥
करुणा की छाया मिले, दृढ़ हो मेरा मान।
मंगल पथ पर साथ दो, स्वीकारो यह गान॥
1. सत्यनारायण भगवान, सत्य के दाता।
मन में जगाओ शुभ विचार॥
2. तेरे स्मरण से विश्वास जागे।
जीवन के तम सब दूर भागे॥
3. सच्चे मन से नाम पुकारूँ।
सदाचार का दीप हृदय में धारूँ॥
4. कर्म-पथ पर देना सहारा।
सत्यनारायण भगवान, तुम हो एकमात्र हमारा॥
5. लोभ-भय से मन को बचाना।
सत्य-सेवा का पाठ पढ़ाना॥
6. घर-आंगन में मंगल लाना।
दीन जनों को गले लगाना॥
7. बुद्धि, बल और धीरज देना।
अच्छे कर्मों का फल ही लेना॥
8. दुख में रखना मन को स्थिर।
सुख में रखना भाव समुचित॥
9. जिनके जीवन में है अँधियारा।
उनके लिए बनो तुम तारा॥
10. हर प्राणी में रूप तुम्हारा।
सेवा से हो पंथ उजियारा॥
11. सत्यनारायण भगवान, सदाचार के दाता।
मन में जगाओ शुभ विचार॥
12. तेरे स्मरण से संतुलन जागे।
जीवन के तम सब दूर भागे॥
13. सच्चे मन से नाम पुकारूँ।
सत्य का दीप हृदय में धारूँ॥
14. कर्म-पथ पर देना सहारा।
सत्यनारायण भगवान, तुम हो एकमात्र हमारा॥
15. लोभ-भय से मन को बचाना।
सत्य-सेवा का पाठ पढ़ाना॥
16. घर-आंगन में मंगल लाना।
दीन जनों को गले लगाना॥
17. बुद्धि, बल और धीरज देना।
अच्छे कर्मों का फल ही लेना॥
18. दुख में रखना मन को स्थिर।
सुख में रखना भाव समुचित॥
19. जिनके जीवन में है अँधियारा।
उनके लिए बनो तुम तारा॥
20. हर प्राणी में रूप तुम्हारा।
सेवा से हो पंथ उजियारा॥
21. सत्यनारायण भगवान, सत्य के दाता।
मन में जगाओ शुभ विचार॥
22. तेरे स्मरण से विश्वास जागे।
जीवन के तम सब दूर भागे॥
23. सच्चे मन से नाम पुकारूँ।
सदाचार का दीप हृदय में धारूँ॥
24. कर्म-पथ पर देना सहारा।
सत्यनारायण भगवान, तुम हो एकमात्र हमारा॥
25. लोभ-भय से मन को बचाना।
सत्य-सेवा का पाठ पढ़ाना॥
26. घर-आंगन में मंगल लाना।
दीन जनों को गले लगाना॥
27. बुद्धि, बल और धीरज देना।
अच्छे कर्मों का फल ही लेना॥
28. दुख में रखना मन को स्थिर।
सुख में रखना भाव समुचित॥
29. जिनके जीवन में है अँधियारा।
उनके लिए बनो तुम तारा॥
30. हर प्राणी में रूप तुम्हारा।
सेवा से हो पंथ उजियारा॥
31. सत्यनारायण भगवान, सदाचार के दाता।
मन में जगाओ शुभ विचार॥
32. तेरे स्मरण से संतुलन जागे।
जीवन के तम सब दूर भागे॥
33. सच्चे मन से नाम पुकारूँ।
सत्य का दीप हृदय में धारूँ॥
34. कर्म-पथ पर देना सहारा।
सत्यनारायण भगवान, तुम हो एकमात्र हमारा॥
35. लोभ-भय से मन को बचाना।
सत्य-सेवा का पाठ पढ़ाना॥
36. घर-आंगन में मंगल लाना।
दीन जनों को गले लगाना॥
37. बुद्धि, बल और धीरज देना।
अच्छे कर्मों का फल ही लेना॥
38. दुख में रखना मन को स्थिर।
सुख में रखना भाव समुचित॥
39. जिनके जीवन में है अँधियारा।
उनके लिए बनो तुम तारा॥
40. हर प्राणी में रूप तुम्हारा।
सेवा से हो पंथ उजियारा॥
तन-मन-वचन सुधरें सभी, रहे सरल व्यवहार।
सत्यनारायण भगवान, चरणों में अर्पित यह, मेरा छोटा प्यार॥
What this prayer remembers
The prayer connects truth, gratitude, family responsibility and sharing prasad after a vow or meaningful milestone.
How to read the aarti
Complete the katha or puja steps appropriate to your tradition, offer prasad, and share it without exclusion.
- Prepare a clean, calm place and light a diya safely.
- Take a breath, remember the deity and recite the traditional opening with attention.
- Close with gratitude and carry one value from the prayer into the day.
Aarti for the right moment
Read at the close of a Satyanarayan vrat or family puja, following the local katha and prasad tradition.
What is the traditional aarti for Satyanarayan Bhagwan?
Jai Lakshmi Ramana is the traditional aarti title most commonly associated with this devotional form. Regional families may sing a different local version.
When should I read Satyanarayan Bhagwan Ki Aarti?
Read at the close of a Satyanarayan vrat or family puja, following the local katha and prasad tradition.
What is the meaning of Satyanarayan Bhagwan Ki Aarti?
The prayer connects truth, gratitude, family responsibility and sharing prasad after a vow or meaningful milestone.