Shani Dev Ki Aarti
Shani Dev ki aarti is a traditional devotional prayer centred on शनि देव. This page keeps the canonical aarti name, its opening line, meaning and a respectful daily practice together for devotees and families.
A quiet space for prayer, gratitude and remembranceJai Jai Shri Shanidev
जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी
यहाँ पारंपरिक शीर्षक, प्रचलित मुखड़ा और एक प्रचलित मंत्र/लघु-आवाहन का संदर्भ दिया गया है। पूर्ण पाठ और मंत्र-पाठ परिवार, मंदिर, संप्रदाय और क्षेत्रीय परंपरा के अनुसार बदल सकते हैं।शनि देव मंत्र
ॐ शं शनैश्चराय नमः
साफ और शांत स्थान पर अपनी श्रद्धा के अनुसार 11, 21 या 108 बार जप करें।शनि देव के लिए मौलिक 40-पद भक्ति रचना
शनि देव का स्मरण कर, मन में जागे प्रकाश।
भक्ति, सेवा, सत्य से, जीवन हो उल्लास॥
करुणा की छाया मिले, दृढ़ हो मेरा मान।
मंगल पथ पर साथ दो, स्वीकारो यह गान॥
1. शनि देव, न्याय के दाता।
मन में जगाओ शुभ विचार॥
2. तेरे स्मरण से अनुशासन जागे।
जीवन के तम सब दूर भागे॥
3. सच्चे मन से नाम पुकारूँ।
धैर्य का दीप हृदय में धारूँ॥
4. कर्म-पथ पर देना सहारा।
शनि देव, तुम हो एकमात्र हमारा॥
5. लोभ-भय से मन को बचाना।
सत्य-सेवा का पाठ पढ़ाना॥
6. घर-आंगन में मंगल लाना।
दीन जनों को गले लगाना॥
7. बुद्धि, बल और धीरज देना।
अच्छे कर्मों का फल ही लेना॥
8. दुख में रखना मन को स्थिर।
सुख में रखना भाव समुचित॥
9. जिनके जीवन में है अँधियारा।
उनके लिए बनो तुम तारा॥
10. हर प्राणी में रूप तुम्हारा।
सेवा से हो पंथ उजियारा॥
11. शनि देव, धैर्य के दाता।
मन में जगाओ शुभ विचार॥
12. तेरे स्मरण से जिम्मेदारी जागे।
जीवन के तम सब दूर भागे॥
13. सच्चे मन से नाम पुकारूँ।
न्याय का दीप हृदय में धारूँ॥
14. कर्म-पथ पर देना सहारा।
शनि देव, तुम हो एकमात्र हमारा॥
15. लोभ-भय से मन को बचाना।
सत्य-सेवा का पाठ पढ़ाना॥
16. घर-आंगन में मंगल लाना।
दीन जनों को गले लगाना॥
17. बुद्धि, बल और धीरज देना।
अच्छे कर्मों का फल ही लेना॥
18. दुख में रखना मन को स्थिर।
सुख में रखना भाव समुचित॥
19. जिनके जीवन में है अँधियारा।
उनके लिए बनो तुम तारा॥
20. हर प्राणी में रूप तुम्हारा।
सेवा से हो पंथ उजियारा॥
21. शनि देव, न्याय के दाता।
मन में जगाओ शुभ विचार॥
22. तेरे स्मरण से अनुशासन जागे।
जीवन के तम सब दूर भागे॥
23. सच्चे मन से नाम पुकारूँ।
धैर्य का दीप हृदय में धारूँ॥
24. कर्म-पथ पर देना सहारा।
शनि देव, तुम हो एकमात्र हमारा॥
25. लोभ-भय से मन को बचाना।
सत्य-सेवा का पाठ पढ़ाना॥
26. घर-आंगन में मंगल लाना।
दीन जनों को गले लगाना॥
27. बुद्धि, बल और धीरज देना।
अच्छे कर्मों का फल ही लेना॥
28. दुख में रखना मन को स्थिर।
सुख में रखना भाव समुचित॥
29. जिनके जीवन में है अँधियारा।
उनके लिए बनो तुम तारा॥
30. हर प्राणी में रूप तुम्हारा।
सेवा से हो पंथ उजियारा॥
31. शनि देव, धैर्य के दाता।
मन में जगाओ शुभ विचार॥
32. तेरे स्मरण से जिम्मेदारी जागे।
जीवन के तम सब दूर भागे॥
33. सच्चे मन से नाम पुकारूँ।
न्याय का दीप हृदय में धारूँ॥
34. कर्म-पथ पर देना सहारा।
शनि देव, तुम हो एकमात्र हमारा॥
35. लोभ-भय से मन को बचाना।
सत्य-सेवा का पाठ पढ़ाना॥
36. घर-आंगन में मंगल लाना।
दीन जनों को गले लगाना॥
37. बुद्धि, बल और धीरज देना।
अच्छे कर्मों का फल ही लेना॥
38. दुख में रखना मन को स्थिर।
सुख में रखना भाव समुचित॥
39. जिनके जीवन में है अँधियारा।
उनके लिए बनो तुम तारा॥
40. हर प्राणी में रूप तुम्हारा।
सेवा से हो पंथ उजियारा॥
तन-मन-वचन सुधरें सभी, रहे सरल व्यवहार।
शनि देव, चरणों में अर्पित यह, मेरा छोटा प्यार॥
What this prayer remembers
Shani worship is a reminder that actions have consequences and that justice must be met with humility, discipline and compassion.
How to read the aarti
Keep the ritual modest, avoid fear-based promises, and let the prayer encourage honest conduct and care for people who are vulnerable.
- Prepare a clean, calm place and light a diya safely.
- Take a breath, remember the deity and recite the traditional opening with attention.
- Close with gratitude and carry one value from the prayer into the day.
Aarti for the right moment
Traditionally read on Saturdays as a prayer for responsibility, fairness and patience through difficult periods.
What is the traditional aarti for Shani Dev?
Jai Jai Shri Shanidev is the traditional aarti title most commonly associated with this devotional form. Regional families may sing a different local version.
When should I read Shani Dev Ki Aarti?
Traditionally read on Saturdays as a prayer for responsibility, fairness and patience through difficult periods.
What is the meaning of Shani Dev Ki Aarti?
Shani worship is a reminder that actions have consequences and that justice must be met with humility, discipline and compassion.