Shiv Ji Ki Aarti
Shiv Ji ki aarti is a traditional devotional prayer centred on भगवान शिव. This page keeps the canonical aarti name, its opening line, meaning and a respectful daily practice together for devotees and families.
A quiet space for prayer, gratitude and remembranceOm Jai Shiv Omkara
ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा
यहाँ पारंपरिक शीर्षक, प्रचलित मुखड़ा और एक प्रचलित मंत्र/लघु-आवाहन का संदर्भ दिया गया है। पूर्ण पाठ और मंत्र-पाठ परिवार, मंदिर, संप्रदाय और क्षेत्रीय परंपरा के अनुसार बदल सकते हैं।शिव जी मंत्र
ॐ नमः शिवाय
साफ और शांत स्थान पर अपनी श्रद्धा के अनुसार 11, 21 या 108 बार जप करें।शिव जी के लिए मौलिक 40-पद भक्ति रचना
शिव जी का स्मरण कर, मन में जागे प्रकाश।
भक्ति, सेवा, सत्य से, जीवन हो उल्लास॥
करुणा की छाया मिले, दृढ़ हो मेरा मान।
मंगल पथ पर साथ दो, स्वीकारो यह गान॥
1. शिव जी, शांति के दाता।
मन में जगाओ शुभ विचार॥
2. तेरे स्मरण से वैराग्य जागे।
जीवन के तम सब दूर भागे॥
3. सच्चे मन से नाम पुकारूँ।
परिवर्तन का दीप हृदय में धारूँ॥
4. कर्म-पथ पर देना सहारा।
शिव जी, तुम हो एकमात्र हमारा॥
5. लोभ-भय से मन को बचाना।
सत्य-सेवा का पाठ पढ़ाना॥
6. घर-आंगन में मंगल लाना।
दीन जनों को गले लगाना॥
7. बुद्धि, बल और धीरज देना।
अच्छे कर्मों का फल ही लेना॥
8. दुख में रखना मन को स्थिर।
सुख में रखना भाव समुचित॥
9. जिनके जीवन में है अँधियारा।
उनके लिए बनो तुम तारा॥
10. हर प्राणी में रूप तुम्हारा।
सेवा से हो पंथ उजियारा॥
11. शिव जी, परिवर्तन के दाता।
मन में जगाओ शुभ विचार॥
12. तेरे स्मरण से धैर्य जागे।
जीवन के तम सब दूर भागे॥
13. सच्चे मन से नाम पुकारूँ।
शांति का दीप हृदय में धारूँ॥
14. कर्म-पथ पर देना सहारा।
शिव जी, तुम हो एकमात्र हमारा॥
15. लोभ-भय से मन को बचाना।
सत्य-सेवा का पाठ पढ़ाना॥
16. घर-आंगन में मंगल लाना।
दीन जनों को गले लगाना॥
17. बुद्धि, बल और धीरज देना।
अच्छे कर्मों का फल ही लेना॥
18. दुख में रखना मन को स्थिर।
सुख में रखना भाव समुचित॥
19. जिनके जीवन में है अँधियारा।
उनके लिए बनो तुम तारा॥
20. हर प्राणी में रूप तुम्हारा।
सेवा से हो पंथ उजियारा॥
21. शिव जी, शांति के दाता।
मन में जगाओ शुभ विचार॥
22. तेरे स्मरण से वैराग्य जागे।
जीवन के तम सब दूर भागे॥
23. सच्चे मन से नाम पुकारूँ।
परिवर्तन का दीप हृदय में धारूँ॥
24. कर्म-पथ पर देना सहारा।
शिव जी, तुम हो एकमात्र हमारा॥
25. लोभ-भय से मन को बचाना।
सत्य-सेवा का पाठ पढ़ाना॥
26. घर-आंगन में मंगल लाना।
दीन जनों को गले लगाना॥
27. बुद्धि, बल और धीरज देना।
अच्छे कर्मों का फल ही लेना॥
28. दुख में रखना मन को स्थिर।
सुख में रखना भाव समुचित॥
29. जिनके जीवन में है अँधियारा।
उनके लिए बनो तुम तारा॥
30. हर प्राणी में रूप तुम्हारा।
सेवा से हो पंथ उजियारा॥
31. शिव जी, परिवर्तन के दाता।
मन में जगाओ शुभ विचार॥
32. तेरे स्मरण से धैर्य जागे।
जीवन के तम सब दूर भागे॥
33. सच्चे मन से नाम पुकारूँ।
शांति का दीप हृदय में धारूँ॥
34. कर्म-पथ पर देना सहारा।
शिव जी, तुम हो एकमात्र हमारा॥
35. लोभ-भय से मन को बचाना।
सत्य-सेवा का पाठ पढ़ाना॥
36. घर-आंगन में मंगल लाना।
दीन जनों को गले लगाना॥
37. बुद्धि, बल और धीरज देना।
अच्छे कर्मों का फल ही लेना॥
38. दुख में रखना मन को स्थिर।
सुख में रखना भाव समुचित॥
39. जिनके जीवन में है अँधियारा।
उनके लिए बनो तुम तारा॥
40. हर प्राणी में रूप तुम्हारा।
सेवा से हो पंथ उजियारा॥
तन-मन-वचन सुधरें सभी, रहे सरल व्यवहार।
शिव जी, चरणों में अर्पित यह, मेरा छोटा प्यार॥
What this prayer remembers
Shiva aarti turns attention toward simplicity, transformation, restraint and the quiet awareness behind daily activity.
How to read the aarti
Offer water, bilva leaves where customary, and a lamp. Keep the space calm and allow a few silent breaths after the final line.
- Prepare a clean, calm place and light a diya safely.
- Take a breath, remember the deity and recite the traditional opening with attention.
- Close with gratitude and carry one value from the prayer into the day.
Aarti for the right moment
Recite on Mondays, during Mahashivratri and as an evening prayer for stillness and inner discipline.
What is the traditional aarti for Shiv Ji?
Om Jai Shiv Omkara is the traditional aarti title most commonly associated with this devotional form. Regional families may sing a different local version.
When should I read Shiv Ji Ki Aarti?
Recite on Mondays, during Mahashivratri and as an evening prayer for stillness and inner discipline.
What is the meaning of Shiv Ji Ki Aarti?
Shiva aarti turns attention toward simplicity, transformation, restraint and the quiet awareness behind daily activity.